गे बंसी अंकल की गांड मारी

अँधेरे में कुछ दिख नहीं रहा था. लेकिन मैं सायकल चलाते हुए अपने घर की तरफ निकला हुआ था. गाँव में कुछ मर्द शाम को भी हगने के लिए गाँव के बहार के रस्ते पर आते है. गोबर के जो पहाड़ से बने हुए है उसके पीछे एकाद दो आदमी हगने के लिए आये ही होते है. गाँव अभी कुछ दूर था की मुझे बंसी अंकल हाथ में लोटा लिए हुए दिखे. बंसी अंकल हमारे दूर के रिश्तेदार है लेकिन वो मर्द और औरत दोनों में नहीं है. वो एक हिजड़ा है जो लडको को लुभा के उनके लंड लेते है. और मैं सच कहूँ तो जब मेरी गर्लफ्रेंड नहीं थी तो मैंने भी दो बार गांड मारी थी उनकी और उन्हें लंड भी चटाया था. हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम 

मेरे को देख के वो रुक के बोले, अरे ओ सुधीर किधर चला?

मैंने कहा, अंकल पड़ोस के गाँव गया था कुछ काम से.

वो बोले, चल मेरे को छोड़ देगा?

मैंने कहा बैठ जाओ पीछे.

वो मेरे पीछे बैठ गए. शर्दी की ठंडी ठंडी पवन मेरे बालो को भी हिला रही थी और बदन में कम्पन सा होता था जब पवन की लहर दौड़ती थी. बंसी अंकल ने कहा, और पढ़ाई कैसी चल रही है शहर में?

मैं: बस फर्स्ट क्लास है सब कुछ.

अंकल: तभी तो हमारी याद नहीं आती आजकल, अंकल को तो भूल ही गए तुम लोग, वो मनीष भी उस दिन नजरें बचा के निकल रहा था मेरे से. साले ने लंड को ठंडा करवाने के लिए कितनी मिन्नतें की थी मेरे से. और फिर शहर की लौंडिया लोग क्या जादू करती है तुम लोगो पर की तुम हमें पलट के देखते भी नहीं. उसके ऊपर तो मैंने पैसे भी बहुत खर्चा किया. एक बार तो मेरी आधी घेहूँ की फसल के पैसे उसे दे दिये थे टच वाले मोबाइल के लिए. हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम 

मैं कुछ नहीं बोला, सच कहूँ तो उसकी गांड मारने का मूड जरा भी नहीं था. लेकिन शायद उसकी गांड में बड़ी खुजली थी. और तभी उसने अपने हाथ को आगे बढ़ा के मेरे लंड पर रख दिया. मैंने चौंक के उसे कहा अरे ये क्या कर रहे हो अंकल?

वो बोला: अरे सिर्फ देख रहा हूँ की एक साल पहले जो लंड छोटा था अब वो बड़ा हुआ की नहीं!

बड़ा हो गया है अंकल आप रहने दो!

लेकिन अब उसके लंड को टच कर लेने से मेरे अंदर की भावना भी धीरे धीरे आलस खा के जाग सी रही थी. लेकिन मैं अब बड़ा हो गया था और कहीं उसकी गांड मारते हुए पकड़ा गया तो पंगे हो सकते थे इस डर से मैंने कुछ कहा नहीं उसे. लेकिन भला चुप रहे वो हिजड़ा कहा से!

उसने मेरे को कहा, चलना है तो बोल मेरे ट्यूबवेल के पीछे का कमरा खाली है, आज मजदुर लोग नहीं है गाँव गए है त्यौहार के लिए.

और ये कह के उसने फिर से मेरे लंड को पकड के हिला सा दिया. अब मेरे लिए भी कंट्रोल करना मुश्किल था. मैंने कहा, कोई और तो नहीं होगा वहाँ पर?

वो बोला, नहीं मजदुर होते है वो आज दोपहर को ही चले गए है सब के सब.

मैंने कहा, कंडोम ले के मेरे को मिलो एक घंटे के बाद और नाहा धो के आना.

बंसी को पता नहीं कितनी ख़ुशी हुई! वो बोला, हां मैं मंदिर के पीछे वाले पानवाले के वहां रहूँगा.

मैंने कहा नहीं तुम गाँव के बहार के रस्ते पर ही मिलना. और किसी को कुछ बोलना मत, मैं चुपचाप आऊंगा उधर वही से निकल लेंगे.

और फिर गाँव के आने से पहले ही मैंने उसे सायकल से भी उतार दिया ताकि कोई हम पर शक ना करे. बंसी मेरे को बाय बोल के गया और उसके चहरे पर अलग ही ख़ुशी थी. हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम 

मेरा दिल जोर जोर से धडक रहा था क्यूंकि बहुत अरसे के बाद आज मैं ये रिस्क ले रहा था. लेकिन क्या करता लंड जो खड़ा था और गर्लफ्रेंड को चोदने में अभी एक महिना और था क्यूंकि एक महिना और छुट्टियां थी एग्जाम की प्रिपरेशन के लिए.

मैं घर गया और आज मैंने जल्दी ही डिनर कर लिया. माँ ने बोला की बिस्तर लगाऊं तो मैंने कहा हां लगा दो लेकिन मैं थोडा बहार जाऊँगा अपने दोस्त के वहां इसलिए आप सो जाना, मैं लेट हो सकता हूँ.

फिर कुछ देर के बाद मैं अपने कपडे चेंज कर के निकल पड़ा. मैंने जानबुझ के डार्क कपडे पहने थे और सर पर मंकी केप भी डाल ली ताकि कोई दूर से मेरे को पहचाने नहीं. फिर मैं चुपके से बंसी को बताये हुए पते पर पहुंचा. वो लालटेन लिए खड़ा था. मैं पहले उसके पास से गुजर गया साइकिल ले के. मैंने देख लिया की उतने में कोई और था नहीं. तो फिर मैं उसके पास वापस आया और वो साइकिल पर बैठ गया. मैंने उसे कहा की लालटेन को एकदम धीरे जलाओ तो उसने वो कर दिया.

फिर साईकिल को मैंने बंसी के बताये हुए कच्चे रस्ते पर चला दी. कुछ देर में उसका ट्यूबवेल आ गया. वो खेत के एकदम बिच में था और वहां पर बिजली थी. लेकिन मैंने बंसी को सिर्फ हलकी रौशनी करने के लिए कहा. साइकिल भी मैंने उस कमरे के पीछे मक्के के खेत में निचे लिटा दी. फिर मैं वापस आया.

बंसी ने कमरे में ले लिया मुझे और उसने डोर को बंद किया. मैंने अपनी पेंट को निकाली और मेरा लंड ताबड़तोड़ खड़ा हुआ लग रहा था. बंसी ने अपनी शर्ट निकाली और वो मेरे लंड को देख के बोला, एक साल में काफी मोटा कर लिया है, शहर में कोई चूत मिली है क्या?

मैंने कहा, हाँ है एक लड़की.

बंसी: बहुत चोदते होगे फिर तो?

मैंने कहा हां वो सब छोड़ो और इस को मुहं में ले लो.

बंसी अपने घुटनों के बल निचे बैठ गया जमीन पर और उसने मेरे लंड को पहले अपने होंठो से टच किया. फिर अपनी आँखों पर लगाया और फिर गाल पर भी. वो जैसे बहुत समय के बाद किसी के लंड को ले रहा था ऐसा रोमांस कर रहा था. मैंने उसके बाल पकडे और मुहं को खोल के खुद ही लंड मुहं में दे दिया. उसके मुहं के मेरे लंड पर चलने से मुझे जो मजा आया वो कह नहीं सकता मैं. मेरी गर्लफ्रेंड तो है लेकिन वो कभी भी सक नहीं करती है. उसे सिर्फ कन्वेंशनल सेक्स यानी की चूत में लंड लेना ही आता है, उस से अधिक हम लोग करते नहीं है.

और मेरे को ब्लोव्जोब का सौख है, इसलिए जब बंसी ने अपने मुहं का जादू चलाया तो मैं एकदम खुश हो गया. इस हिजड़े को लंड चूसने का पक्का अनुभव था और वो बड़े ही मजे से लंड को चूस चूस के मेरे को खुश कर रहा था.

वो बिच बिच में लंड को मुहं से बहार निकाल के उसके डंडे को लिक करता था और फिर मेरे बॉल्स को भी चुसता था. मैंने हाथ निचे कर के उसके मेल बूब्स को दबाये तो वो सिहर उठा और उसके मुहं से लेडिज वाले अंदाज में आह निकली, साला नौटंकीबाज!

फिर मैंने उस से कंडोम लिया. कंडोम को मैंने अपने लंड पर पहन लिया और बंसी अपने सब कपडे निकाल के घोड़ी बन गया. मैं लंड को उसकी गांड में डालने को ही था की उसने मुझे रोक लिया. उसने अपनी शर्ट की जेब से एक पेकेट निकाल के मेरे को दिया. मेरे को अँधेरे में दिखा नहीं तो मैंने कहा अरे पहना तो कंडोम, डबल करूँ क्या?

वो बोला, ये निरोध नहीं है, ये चिकना पानी है जिस से आराम से घुसता है.

ओ अच्छा, उसने मेरे को लुब्रिकेंट दिया था. मैंने वो पेकेट को तोड़ के थोडा लुब्रिकेंट अपने कंडोम वाले लंड पर लगाया और फिर अपने लंड को उसकी गांड के ढक्कन पर रख दिया. बंसी ने थोड़ी नजाकत से अपनी गांड को हिलाया और मैंने धीरे से पुश कर दिया. मेरे दोनों हाथ उसके कंधे पर थे और पुश करते ही मेरा लंड पुच की आवाज से गांड में आधा घुस गया!

वो गांड का होल सख्त था और घुसाने में मजा आ गया. बंसी के मुहं से भी आह निकली और वो अपने एक हाथ से कूल्हों को फाड़ रहा था जैसे. मैंने एक और धक्का दिया और पूरा लंड उसकी गांड में कर दिया. वो कराह उठा लेकिन मजा तो हम दोनों को आया था. बंसी के कंधो को पकड के अब मैंने हौले हौले से उसकी गांड मारने लगा. और एक मिनिट में उसका दर्द कम हो गया. और वो भी अपनी गांड की खुजली को दूर करने के लिए अपनी गांड को हिलाने लगा. मेरा लंड उसकी गांड में फिट था और वो आगे पिछे कर के अपनी गांड की आयल सर्विस करवा रहा था मेरे लंड से.

मैंने अब हाथ कंधे से हटा के उसकी मेल बूब्स पर दबाये और उन्हें दबाते हुए गांड मारने लगा. उसकी निपल्स जो उतनी बड़ी नहीं थी फिमेल के जैसी. लेकिन वो मेल निपल्स के जैसी छोटी भी नहीं थी. उसे भी मजा आ रहा था जब मैं उसके निपल से खेल रहा था. वो भी अब उछल उछल के लंड ले रहा था अपनी गांड की गुफा में.

पांच मिनिट तक मैंने इस हिजड़े की गांड को चोदा और फिर मेरे लंड का पानी धार तक आ चूका था. एक लम्बे झटके के साथ मैंने अपने लंड की पिचकारी को छोड़ दिया. मेरा सब पानी निकल के उसकी गांड में ही बह निकला. लेकिन कंडोम की वजह से पानी गांड में गया नहीं. बंसी ने अपनी गांड को ढीला कर दिया और मैंने धीरे से अपने लंड को अंदर से निकाल लिया. कंडोम को निकाल के वो फिर से मेरे लंड को चूसने लगा. उसने मेरे लंड को पूरा चाट चाट के साफ़ कर दिया. फिर मैं अपने कपडे पहनने लगा. वो भी अपने कपडे पहन के खड़ा हो गया. हिंदी पोर्न स्टोरीज डॉट कॉम 

मैंने उसे कहा, कोई माल है क्या जो अपनी चूत मेरे को दे?

वो नजरें टेढ़ी कर के बोला, चूत मिल गई फिर आप मेरी थोड़ी मारोगे.

मैंने कहा तेरी भी मारूंगा लेकिन बहुत दिनों से किसी की चूत नहीं चोदी तो कोइ हो तो बता दे.

वो बोला, मेरे मजदुर की बीवी है, अभी जवान है और उसका पति शराबी है, रात को करवटें बदलती है और उसे लंड की आवश्यकता है.

मैंने कहा मेरा सेटिंग करवा दोना उसके साथ.

बंसी ने कहा वो लोग त्यौहार कर के अगले हफ्ते आयेंगे वापस तब कुछ करता हूँ.

फिर उसने मेरे को खुश हो के हजार रुपये दे दिए और फिर हम कमरे से बहार आ गए. बंसी ने कहा तू अकेला ही गाँव चला जा मेरे को रात में पानी सिंचाई करना है. मैंने कहा ये भी ठीक है.

फिर मैं अकेला ही गाँव में आ गया. घर ना जा के मैं वीडियो पार्लर में 36 चाइना टाउन देखने के लिए चला गया. बंसी के खेत की मजदूरन के साथ मेरा सेटिंग हुआ की नहीं वो आप को अपनी अगली कहानी में बताऊंगा दोस्तों. मेरी कहानी पढने के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद.

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